कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलो को देखते जहां केंद्र सरकार जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन जनता को लगवा देना चाहती है पर हांलि मे आई 8 महीने पहले लगी वैक्सीन का प्रभाव 84% कम होने की जानकारी ने सरकार को चिंतित कर दिया है जिसके चलते अब लोगो को बूस्टर डोज लगाने की बात चल रही है।
जिसको लेकर विषाणु वैज्ञानिक डॉ. शाहिद जमील ने दावा किया है कि भारत में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कोवावैक्स वैक्सीन अहम रोल अदा कर सकती है।
भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स संघ (इनसाकॉग) के परामर्श समूह के पूर्व प्रमुख शाहिद जमील ने कहा कि इस वक्त मौजूद आंकड़ों से यह पता चलता है कि भारत में स्वीकृत टीकों में जिन लोगों को कोविशील्ड का टीका लगा है उन्हें इसी टीके की एक और खुराक दिए जाने के बजाए कोवावैक्स बेहतर बूस्टर खुराक होगी।
जिसको लेकर अधिकारियों का कहना कि एहतियाती खुराक उसी टीके की तीसरी खुराक होगी, जो पूर्व में किसी व्यक्ति को लगे होंगे। कोवावैक्स को अमेरिका स्थित टीका निर्माता नोवावैक्स इंक ने विकसित किया है और उसने वाणिज्यिक उत्पादन के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से लाइसेंस करार की घोषणा की थी। साथ ही केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन ने भी कोवावैक्स को सोमवार को मंजूरी दी थी।
विषाणु विज्ञानी गगनदीप कंग ने कहा कि भारत में फिलहाल इस संदर्भ में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि तीसरी खुराक के तौर पर किस टीके का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने ब्रिटेन के एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें उन व्यक्तियों में उत्पन्न प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का आकलन गया था जिन्हें पहले से ही कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक मिल चुकी है और उन्हें बूस्टर खुराक के तौर पर या तो उसी टीके की तीसरी खुराक दी गई या नोवावैक्स टीका लगाया गया। नोवावैक्स को ही भारत में कोवोवैक्स के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि अध्ययन में पाया गया कि कोविशील्ड की एक तीसरी खुराक ने ज्यामितीय माध्य अनुपात यानि की जीएमआर में 3.25 की वृद्धि की, जबकि कोवोवैक्स की एक बूस्टर खुराक से आठ गुना वृद्धि हुई और एक एमआरएनए टीके से इसमें 24 गुना तक की बढ़ोतरी हुई।